Opinion: अब दिमाग को चुभने लगी है ‘अनुपमा’, उसे कोई हक नहीं कि वो भोली-भाली औरतों को नासमझी का पाठ पढ़ाए
टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ पर मेरा दृष्टिकोण कुछ लोगों को शायद बुरा लग सकता है क्योंकि बिल्कुल सीधा और सटीक है। बाकी निजी धारणा पर विचार रखने के लिए तो हर कोई स्वतंत्र है। अनुपमा सीरियल टीवी पर एक सीरियल आता है ‘अनुपमा’। वैसे तो मैं डेली सोप की बिल्कुल भी शौकीन नहीं हूं लेकिन वर्क फ्रॉम होम की वजह से इसपर कई बार नजर पड़ी। तब लगा कि एक बार फॉलो करके देखते हैं आखिर इसमें ऐसा क्या है कि लोग और खासकर औरतें इसकी तरफ काफी आकर्षित हैं। इसके साथ ही, शो हमेशा TRP लिस्ट में भी नंबर वन पर बना हुआ है। थोड़ा देखा और सुना तो जानकारी मिली कि सीरियल का थीम है ‘वुमन इंपावरमेंट’। ये शब्द ऐसा है, जिसपर बीते सालों में हजार फिल्में, सैकड़ों वेब सीरीज और दर्जनभर सीरियल्स तो बन ही गए हैं। इसलिए टॉपिक सुनकर ही घिसा-पिटा लगता है लेकिन हमेशा आंखों में कुछ अच्छा देखने की ललक रहती है। तो, इसके बारे में पड़ताल तो करनी थी। जैसे-जैसे शो आगे बढ़ा, वैसे-वैसे डाउट्स क्लियर होते गए। कौन से डाउट्स? बताते हैं। कहानी आगे बढ़ रही, दिमाग सवाल कर रहा सीरियल का थीम है वुमन इंपावरमेंट और साथ ही सोशल टैबू। यानी कि इसके एप...